युवाओं में नशीले पदार्थों के सेवन के प्रति बढ़ती प्रवृत्ति: समाजशास्त्रीय अध्ययन

  • डॉ0 रश्मि पाण्डेय

Abstract

21वीं सदी में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में औषधियों को सेवन करते हैं। कुछ बीमारियों के उपचार हेतु तो कुछ व्यक्ति नये अनुभवों के लिए, और कुछ रोमांचक अनुभूति के लिए औषधियों का सेवन करते है। जब मनुष्य इनका सेवन स्वास्थ्य लाभ के लिए नहीं अपितु आदतन नशे के रूप में करता है तब ये औषधियाँ हमारे शारीरिक क्रिया तंत्र में सुधार लाने के बजाय संकट उत्पन्न्ा करती है। औषधियों का गलत प्रयोग करना औषधि दुर्व्यसन कहलाता हैं। आदिकाल से ही मद्यपान और नशीले पदार्थों के साधन मसलन अफीम, गांजा, चरस, भांग आदि हमारे समाज में प्रचलन में रहे है, इनके साथ ही साथ चिकित्सा जगत के विकास ने हमारे समाज को नशीली औषधियों को भी उपहार स्वरूप प्रदान किया है। व्यक्तियों के लिए जीवनदायी औषधियों के अत्यधिक सेवन से सारा विश्व जूझ रहा है। विश्व के साथ ही साथ भारतीय महानगरों, कस्बों और गॉवों में नशीले पदार्थों का सेवन हमारे समाज के लिए युद्ध की विभीषिका से भी कई गुना अधिक खतरनाक है। वर्तमान युवा पीढ़ी दिषा निर्देशन के अभाव में प्रतिपल, लक्ष्यविहीन हो रही है। अभी तक अधिकतर ज्ञान इस बात के लिए जिसके द्वारा इन पर नियंत्रण करने में सफलता प्राप्त की जा सके पर्याप्त नहीं है जिससे कि ऐसी कोई योजना बनाई जा सके तथा इनसे बचा जा सके। अतः आवश्यकता है किसी ऐसे शैक्षणिक कार्य की जिससे युवकों में इन पदार्थों (मेडिकल दवाओं के अतिरिक्त) के प्रयोग से रोका जा सके।
How to Cite
डॉ0 रश्मि पाण्डेय. (1). युवाओं में नशीले पदार्थों के सेवन के प्रति बढ़ती प्रवृत्ति: समाजशास्त्रीय अध्ययन. Academic Social Research:(P),(E) ISSN: 2456-2645, Impact Factor: 6.209 Peer-Reviewed, International Refereed Journal, 9(2). Retrieved from https://asr.academicsocialresearch.co.in/index.php/ASR/article/view/807

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